बुद्ध के सूत्रवाक्य को आत्मसात करते हुए देश के वरिष्ठ साहित्यकारों का सचल कार्याशाला यात्रा दल चंदौली पहुंचा

पीडीडीयू नगर,चंदौली: ”चरथ भिक्खवे चारिकं बहुजन हिताय बहुजन सुखाय, लोकानुकंपाय अत्थाय हिताय सुखाय देव मनुस्सानं।” गौतम बुद्ध के इस सूत्रवाक्य को आत्मसात करते हुए देश के वरिष्ठ साहित्यकारों, कवियों और लेखकों का सचल कार्याशाला यात्रा दल मंगलवार को चंदौली पहुंचा। जहां गोधना मोड़ पर साहित्यकार,समाजसेवी डॉ. अवधेश दीक्षित और स्पोर्ट्स एसोसिएशन ऑफ चंदौली, नंद बॉक्सिंग एकेडमी के खिलाड़ियों ने माला पहनाकर उनका जोरदार स्वागत किया।

यात्रा के संयोजक और साहित्यकार प्रो.सदानंद साही ने बताया कि बुद्ध की धरती कुशीनगर, लुम्बिनी, बोधगया, सारनाथ बौद्ध परिपथ की साहित्यिक-सांस्कृतिक यात्रा चरथ भिक्खवे 15 से 25 अक्टूबर तक होगी। इसका आरंभ मंगलवार को केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान सारनाथ से केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान के कुलपति प्रो. डब्ल्यू डी नेगी की अध्यक्षता में हुआ। हिंदी के वरिष्ठ कवि, साहित्यकार और आलोचक डॉ.रामज्ञा शशिधर ने कहा कि यह एक ज्ञान यात्रा है। जिसके संस्मरण और अनुभव हम आजीवन संजोकर रखेंगे। बुद्ध के विचार को आत्मसात करने के लिए यात्रा आधार बनेगी।
साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित कवि ज्ञानेंद्रपति, भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार से कवियत्री गगन गिल, रंजना अरगड़े, प्रो. सदानन्द साही, डॉ. प्रकाश उदय, डॉ. रामसुधार सिंह, डॉ.रामाज्ञा राय, डॉ. मृदुला सिन्हा, डॉ. जाह्नवी सिंह, डॉ. रमाशंकर सिंह, डॉ. निरंजन यादव, आनंदरूप, शैलेन्द्र सिंह, डॉ. विहाग वैभव, अंशु प्रिया, सना सबा शामिल हैं। चंदौली में इनका स्वागत करने वालों में डॉ.अवधेश दीक्षित, नन्द बॉक्सिंग अकादमी के कोच कुमार नंदजी, अभिषेक यादव,अरविंद मिश्र, अमन चौहान,अमन कुमार, विनोद कुमार,सूरज कुमार, विकास यादव रहे।
प्रो.सदानंद साही ने कहा कि हमारे देश की विडंबना है कि यहां जो भी अच्छा क्वालिटी का होता है उसे विदेश भेज दिया जाता है। इसी तरह बुद्ध के क्वालिटी के विचार विदेश भेज दिया गया, अपने देश में हम कमतर विचारों से काम चला रहे हैं। करुणा और मैत्री जैसे श्रेष्ठतम मानवीय विचार को बुद्ध ने जिस धरती पर भ्रमण करते हुए बताया और दुनिया उन्हें एशिया के आलोक के रूप में देखती है वह आज इसी धरती से गायब हो गए हैं। आखिर ऐसा क्यों है कि बुद्ध हमारे लिए पर्यटन और राजस्व बनकर रह गए हैं। कहा कि यह एक भौतिक यात्रा के साथ ही हमारी अंतर्यात्रा भी है।



