बीएचयू स्थित केन्द्रीय विद्यालय में ‘सत्या फाउंडेशन’ ने छात्रों को ध्वनि प्रदूषण के प्रति किया जागरूक

वाराणसी,यूपी: शनिवार को बीएचयू परिसर स्थित केन्द्रीय विद्यालय में ‘सत्या फाउंडेशन’ के चेतन उपाध्याय और नगर के प्रसिद्ध हृदय-रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय कुमार पाण्डेय ने प्रातः कालीन प्रार्थना-सभा के दौरान ध्वनि-प्रदूषण के दुष्प्रभावों से दो हजार से अधिक विद्यार्थियों और शिक्षकों के समूह को जागरूक किया।
चेतन उपाध्याय ने बताया कि दीपावली दीपों का त्योहार है, जिसमें ज़हरीले प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। उन्होंने सरकारी प्रावधानों की चर्चा की तथा बताया कि शिक्षा संस्थानों, अस्पतालों, उपासना स्थलों, न्यायालय के आस-पास किसी भी प्रकार की ध्वनि, यहां तक कि स्कूटर का हॉर्न भी नहीं बजाया जा सकता। रात दस बजे से सुबह छह बजे के बीच विवाह तथा पूजा-जुलूस निकालते समय भी गीत-संगीत का प्रयोग किया जाना दंडनीय अपराध है. चेतन उपाध्याय ने स्पष्ट किया कि दिन के दौरान साउंड कम और रात 10 से सुबह 6 के बीच पूरी तरह से स्विच ऑफ (बंद), फिर चाहे वो मस्जिद या मंदिर ही क्यों नहीं हो. इसके अलावा तीसरी बात कि दिन हो या रात, साइलेंस जोन में पूर्ण शांति का नियम है. इस तरह के सभी मामलों में पर्यावरण संरक्षण अधिनियम-1986 के अंतर्गत ₹1,00,000 तक जुर्माना या 5 साल तक की जेल या एक साथ दोनों सजा हो सकती है।
चेतन उपाध्याय ने यह भी बताया कि केवल दीपावली ही नहीं कुछ लोग क्रिसमस और नए वर्ष पर भी प्रदूषण फैलाते हैं. पिछले कई वर्षों से ‘सत्या फाउंडेशन’ की पहल पर, दिसंबर के महीने में,बनारस के बिशप हाउस द्वारा जनता से यह अपील की जाती है कि क्रिसमस और नए साल पर डी.जे. और पटाखा बजाकर भय और आतंक का माहौल न बनायें।
चेतन उपाध्याय ने छात्रों से ध्वनि -प्रदूषण रोकने और चीनी दीयों की बजाय देसी मिट्टी के दीयों का प्रयोग करने संबंधी प्रतिज्ञा करवाई।
अपने संबोधन में विद्यालय के प्राचार्य ए.के. सिंह ने विद्यार्थियों से अपेक्षा की कि वे ली गई प्रतिज्ञा का पालन करेंगे और ध्वनि -प्रदूषण के दुष्प्रभावों से स्वयं को तथा समाज को बचाएंगे।



