डी.जे. के शोर से बीमार होती गायों की बात सुन कर मुख्यमंत्री हुए चिंतित

गोरखपुर(वाराणसी): उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, सोमवार की सुबह गोरखपुर में जनता दर्शन कार्यक्रम में लोगों की शिकायत सुन रहे थे, तभी यहाँ पर एक अलग प्रकार का मामला पहुँचा।वाराणसी से आये युवक संदीप सिंह ने मुख्यमंत्री जी को लिखित रूप में शिकायत देकर डी.जे. के चलते गायों के बीमार होने और दूध कम हो जाने का मामला उठाया और कहा कि इसके कारण आम जनता में बहुत गुस्सा और आक्रोश है. प्रमाण स्वरुप, अखबार की प्रति भी दिखाई कि किस प्रकार से सरकारी पशु चिकित्सा अधिकारी भी बता रहे हैं कि डी.जे. के तेज शोर के चलते गायों का बीमार होना और दूध कम होना, एक आम बात होती जा रही है. खबर पढ़ते ही मुख्यमंत्री एक पल के लिए भौचक हो गए मगर फिर तुरंत ही खुद को संभाला और कहा कि डी.जे. के शोर को नियंत्रित करने के लिए सरकार द्वारा पूरा प्रयास किया जाएगा।
सोमवार को मुख्यमंत्री को दिये गए पत्र में कहा गया है कि पिछले 6-7 वर्षों से ऐसा हो रहा है कि जब-जब बहुत अधिक तेज डी.जे. बजता है, तब-तब गांव की गायों का दूध देना कम हो जा रहा है। विज्ञान की किताबों के मुताबिक अच्छे स्वास्थ्य के लिए 40 से 50 डेसीबल की ध्वनि उचित होती है और कानून ने पहले ही 65 से 70 डेसीबल तक की ध्वनि की अनुमति दे रखी है। 70 डेसीबल से ज्यादा की कोई भी ध्वनि मनुष्य और जानवरों के लिए बहुत खतरनाक है जबकि डी.जे. की न्यूनतम ध्वनि 100 डेसीबल या उससे से बहुत अधिक ज्यादा होती है और पशु चिकित्सक भी मान रहे हैं कि तेज ध्वनि के चलते हमारे दुधारू पशु बीमार हो रहे हैं और इसी फलस्वरुप उनका दूध देना भी कम हो जा रहा है।
पत्र में आगे कहा गया है कि जब भी तेज शोर के खिलाफ पुलिस को शिकायत करते हैं तो पुलिस कम करा जाती है मगर फिर से आवाज तेज हो जाती है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वेबसाइट पर उपलब्ध आदेश के मुताबिक रात्रि 10:00 बजे से 6:00 के बीच सिवाय साउंड प्रूफ ऑडिटोरियम के किसी भी खुली जगह में लाउडस्पीकर नहीं बजाया जा सकता और इन 8 घंटों के दौरान किसी भी डेसीबल मीटर की जरूरत नहीं है, मगर फिर भी आए दिन कानून तोड़ा जा रहा है जिसके कारण हम सब का अस्तित्व खतरे में है. पुलिस का कहना है कि अगर सभी थानों और पुलिस चौकियों को डेसीबल मीटर दे दिए जाएं तो दिन में भी कानून द्वारा निर्धारित डेसीबल सीमा के ऊपर शोर पर मुकदमा कायम किया जा सकता है।
इसकी जानकारी चेतन उपाध्याय संस्थापक सचिव सत्या फाउण्डेशन ने दी।



