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गोरखपुर स्थित लिटिल फ्लावर स्कूल में बच्चों को गैरकानूनी शोर में डीजे बजाने से नुकसान के प्रति किया गया जागरूक

गोरखपुर,यूपी: सत्या फाउंडेशन के संस्थापक चेतन उपाध्याय द्वारा गोरखपुर स्थित लिटिल फ्लावर स्कूल में ध्वनि प्रदूषण के प्रति विद्यार्थियों को जागरूक करते हुए बताया गया कि दिन के दौरान भी 70 डेसीबल से अधिक का शोर गैरकानूनी है चुकी डीजे का न्यूनतम ध्वनि स्तर इससे कहीं अधिक होता है जिससे समाज में रहने वाले बुजुर्ग को हृदय से जुड़ी समस्याएं उत्पन्न हो रही है तथा विद्यार्थियों को भी पढ़ाई के प्रति एकाग्रता बनाने में दिक्कतें आती हैं और अब तो इस असहनीय आवाज के चलते गायों ने भी दूध देना कम दी है।

घर बैठे ऑनलाइन मुकदमा दर्ज कराने के लिए गूगल प्ले स्टोर से UPCOP नामक ऐप को डाउनलोड किया जा सकता है।विद्यार्थियों को बताया गया कि दिन के दौरान, अधिक साउंड पर भी मुकदमे का प्रावधान है। मगर रात के समय, यानी रात्रि 10:00 बजे से सुबह 6:00 के बीच किसी भी विवाह जुलूस या धार्मिक स्थल के लाउडस्पीकर के खिलाफ, मुकदमा कराने के लिए किसी डेसीबल मीटर की जरूरत नहीं है क्योंकि इस दौरान साउंड को, पूरी तरह से स्विच ऑफ करने का नियम है। इसके लिए रात के 10.05 पर ही, बारात या जुलूस के बैंड बाजा, आतिशबाजी या डीजे का लाईव वीडियो (वीडियो में अगर कुछ गाड़ियों की वाहन संख्या भी रिकॉर्ड हो जाए तो पुलिस को ध्वनि अपराधी तक पहुंचने में ज्यादा सहूलियत हो जाती है) या फिर सुबह 6 बजे के पहले किसी भी धार्मिक स्थल के लाउडस्पीकर का वीडियो फेसबुक पर डाल दीजिये और फेसबुक का सर्वर, समय भी बताएगा। अब UPCOP ऐप पर जाकर अपनी तहरीर में उक्त लाइव वीडियो के लिंक को भी डाल दें, जिसे कोर्ट भी सबूत के रूप में स्वीकार करती है। दोषी को पर्यावरण संरक्षण अधिनियम-1986 के तहत ₹1,00,000 तक जुर्माना या 5 साल तक की जेल या एक साथ दोनों सजा हो सकती है।

दोनों ही स्कूलों में आज गुरुवार को आयोजित कार्य्रक्रमों में ‘सत्या फाउण्डेशन’ द्वारा इस बात पर विशेष फोकस किया गया कि अगर सभी विद्यार्थी और उनके अभिभावक शोर के खिलाफ पुलिस के 112 नंबर पर गुप्त शिकायत और ऑनलाइन मुकदमा कराना शुरू कर देंगे तो अपने आप कानून का राज स्थापित होना शुरू हो जाएगा। कार्यक्रम के अंत में गोरखपुर के गीता वाटिका धर्मपुर स्थित लिटिल फ्लावर स्कूल के प्रधानाचार्य फादर सुरेश के.वी. ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

Indians News

Editor in Chief

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