गोरखपुर के महाराणा प्रताप इंटरमीडिएट कॉलेज में सत्या फाउंडेशन द्वारा विद्यार्थियों को ध्वनि प्रदूषण से जुड़ी दी जानकारी

गोरखपुर,यूपी: महाराणा प्रताप इंटरमीडिएट कालेज, गोरखपुर में आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों से संकल्प कराया गया कि देश के कानून का पालन करते हुए साइलेंस जोन (शांत क्षेत्र) में यानी स्कूल, अस्पताल, पूजा स्थल और कोर्ट के पास कोई भी शोर नहीं करेंगे. साइलेंस जोन के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी, दिन में साउंड को कम और रात 10 से सुबह 6 बजे के बीच साउंड को स्विच ऑफ रखेंगे /अपने आनंद के लिए आसपास के लोगों को शोर द्वारा परेशान नहीं करेंगे।
सत्या फाउंडेशन के संस्थापक चेतन उपाध्याय ने कहा कि डीजे पश्चिमी संस्कृति की उपज है और अपने देश में तो शहनाई, ढोल, मजीरा, सारंगी, शंख आदि का चलन रहा है। देश के कानून के मुताबिक़, दिन के दौरान भी 70 डेसीबल से अधिक का शोर गैर कानूनी है और चूँकि डीजे का न्यूनतम ध्वनि स्तर इससे कहीं अधिक होता है, लिहाजा सड़क या लान या किसी भी खुली जगह में ऐसा शोर गैर कानूनी है और जिनको ऐसा डीजे पसंद हो वे साउंड प्रूफ हाल या सभागार में ही इसका मजा लें, यही देश का कानून है। जब विद्यार्थियों को हाल के 30 दिनों के विभिन्न समाचार पत्रों का हवाला देते हुए बताया गया कि फ्री स्टाइल में उत्सव मनाने की होड़ में तेज शोर के चलते गायों ने भी दूध देना कम कर दिया है तो विद्यार्थी एकदम चौंक से गए और सभी ने कहा कि डी.जे. पर लगाम लगाने में ही समाज की भलाई है।

विद्यार्थियों को बताया गया कि घर बैठे ऑनलाइन मुकदमा दर्ज कराने के लिए गूगल प्ले स्टोर से UPCOP नामक ऐप को डाउनलोड किया जा सकता है।विद्यार्थियों को बताया कि दिन रात के 10.05 पर ही, बारात या जुलूस के बैंड बाजा, आतिशबाजी या डीजे का लाईव वीडियो या फिर सुबह 6 बजे के पहले किसी भी धार्मिक स्थल के लाउडस्पीकर का वीडियो फेसबुक पर डाल दीजिये और फेसबुक का सर्वर, समय भी बताएगा। अब UPCOP ऐप पर जाकर अपनी तहरीर में उक्त लाइव वीडियो के लिंक को भी डाल दें, जिसे कोर्ट भी सबूत के रूप में स्वीकार करती है. दोषी को पर्यावरण संरक्षण अधिनियम-1986 के तहत ₹1,00,000 तक जुर्माना या 5 साल तक की जेल या एक साथ दोनों सजा हो सकती है। कार्यक्रम के अंत में महाराणा प्रताप इंटरमीडिएट कॉलेज गोरखपुर के प्रधानाचार्य अरुण कुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया।



