राजनीति

समूह सखियों ने श्रम मानक के अनुरूप मानदेय फिक्स करने क़ो लेकर धरना दिया

चंदौली,यूपी:राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत काम करने वाली जनपद के तमाम ब्लाकों की समूह सखी , बैंक सखी और बुककीपरो ने धरना स्थल बिछयां मे धरना देकर पंचायत किया।धरना स्थल पर उपजिलाधिकारी सदर ने मुख्यमंत्री के नाम मांग पत्र धरना दे रही समूह सखियों से लिया. उपजिलाधिकारी ने कहा कि मांग पत्र शासन क़ो भेज दिया जाएगा. जो प्रशासन स्तर की समस्या होंगी उसपर पूरी संवेदनाओ के साथ विचार कर दूर किया जाएगा. समूह सखी की संयोजक और प्रवक्ता राजेश्वरी चतुर्वेदी ने बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन मे कई कई वर्षो से समूह सखियाँ बिना किसी अवकाश के प्रतिदिन 8 घंटे से ज्यादा काम करती है।ये क्रम पुरे महीने चलता है. समूह सखियों क़ो अन्य कर्मियों के समान

बीएमएम, अकॉउंटेंट एमआईएस, शिक्षा मित्र, अनुदेशक और आंगनबाड़ी की तरह नियमित कर,श्रम मानक के अनुरूप न्यूनतम मानदेय रुपया – 14 हजाऱ फिक्स किया जाय.समूह की अध्यक्ष गीता मौर्या ने कहा कि समूह सखी, बैंक सखी और बुककीपर का मानदेय श्रम मानक के अनुरूप फिक्स नहीं है. ना ही कोई अतिरिक्त भत्ता है, ना ही कोई मेडिकल कवर.जबकि समूह सखियाँ रोज लगभग 3 से 4 किमी पैदल चलकर अपने कार्य क़ो अंजाम देती है. इन समूह सखियों की कोई छुट्टी भी नहीं होती. यहाँ तक की इतवार क़ो भी बैठक करना पड़ता है।इनको हर हालत मे समूह की मीटिंग करनी ही होती है.।एक समूह सखी के अधीन औसतन लगभग 15 समूह होते है।

इन प्रत्येक समूहों की साप्ताहिक बैठक करनी ही होती है। पुरे समूहों की साप्ताहिक बैठक अनिवार्य है। इसलिए एक दिन मे दो समूहो की बैठक या इससे भी ज्यादा बैठक करना पड़ता है। एक समूह मे कम से कम 10 महिलाये होती है. पैसे का लेखा जोखा, जमा, निकासी ऋण का भुगतान, सरकारी योजनावो के बारे मे हर महिलावो से चर्चा आदि मे कम से कम 3 से 4 घंटे लगते है. इस हिसाब से 30 सों दिन समूह सखियों क़ो रोजाना 8 घंटे से ज्यादा काम करना पड़ता है. महीने मे दो दिन समूह सखियों की बैठक सीएलएफ पर ब्लाक़ मे होती है. उसमे उपस्थिति अनिवार्य है. महीने मे दो दिन ग्राम संगठन की बैठक मे समूह सखी भाग लेती है. बीच बीच मे ब्लाक मे काम करने के लिए भी समूह सखियों क़ो बुलाया जाता है.इसके अतिरिक्त तमाम संगठन का काम जैसे – मोबाईल मे डाटा अपलोड करना लोकोस का काम, लखपती दीदी का काम, कर्मयोगी, आजीविका सखी और समूह का डाटा फीड करना आदि अपने समय मे 8 घंटे के अतिरिक्त समय मे करना पड़ता है। जिसके लिए स्मार्ट फोन के साथ साथ नेटवर्किंग डाटा भी डलवाती है। सारा आर्थिक बोझ ये स्वयं सखियाँ अपनी जेब से करती है.राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से सिर्फ महिलाये ही अकेले लाभान्वित नहीं होती, इसमें महिलाये समूह के माध्यम से बैंक से ऋण लेती है और उसका ब्याज बैंक क़ो भुगतान कर, राष्ट्र निर्माण मे आर्थिक सहयोग भी देती है। इन सबके बीच की कड़ी जैसे – बचत क़ो जमा करना, लेखा जोखा पर निगाह रखना,पैसे दिलवाने से लेकर ऋण जमा करवाने के बीच की कड़ी है. समूह सखियाँ एक तरह से ऋण अधिकारी की तरह काम कर महिलाओ क़ो आत्म निर्भर बनने की प्रेरणा भी देती है. साथ ही सरकार का भी सहयोग करती है. इस सबको देखते हुवे समूह सखियों क़ो नियमित कर श्रम मानक के अनुरूप न्यूनतम मानदेय 14 हजार फिक्स किया जाय।साथ ही मोबाइल भी भी दिया जाय।

इसमें लगने वाला डाटा के लिए डाटा भत्ता भी दिया जाय। अगर हमारी मांगो पर ध्यान नहीं दिया गया तो जिले की समूह सखी, बैंक सखी और बुककीपर लखनऊ कूच करेंगी। पंचायत में जिले की सभी ब्लाकों की सैकड़ों महिलाये धरने मे शामिल रही।पंचायत क़ो समूह सखी संघर्ष मोर्चा की अध्यक्ष गीता मौर्या संयोजक और प्रवक्ता राजेश्वरी चतुर्वेदी सचिव कृष्णावती, सुभावती, उषा सरिता ने सम्बोधित किया। पंचायत की अध्यक्षता सरस्वती देवी और संचालन राजेश्वरी चतुर्वेदी ने किया।

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Editor in Chief

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