चेतना मंच की टीम द्वारा नेत्रदान बना जीवनदान : चुन्नू ठठेरा की आँखों में लौटी रोशनी

पीडीडीयू,चंदौली: पिछले दिनों सिलेंडर ब्लास्ट की दर्दनाक घटना में लाट नंबर-1 निवासी चुन्नू ठठेरा अपनी दोनों आँखों की रोशनी खो बैठे थे। उनके जीवन में चारों ओर अंधेरा छा गया था। परिवार के सामने भी एक बड़ी चिंता खड़ी हो गई थी कि आखिर चुन्नू फिर कभी इस दुनिया को देख पाएँगे या नहीं।
लेकिन कहते हैं कि यदि समाज में संवेदनशील लोग मौजूद हों, तो उम्मीद कभी खत्म नहीं होती।
चेतना नेत्र, रक्त व अंगदान मंच के अध्यक्ष डॉ.विकास गर्ग की दूरदर्शी सोच और लगातार चल रहे नेत्रदान जागरूकता अभियान ने चुन्नू के जीवन में नई रोशनी ला दी।
मंच के प्रयासों और प्रसिद्ध नेत्र सर्जन डॉ. सुनील शाह से हुई चर्चा के परिणामस्वरूप गुरुवार को जनपद में हुए 250 वें नेत्रदान के अवसर पर चुन्नू ठठेरा को अस्पताल बुलाया गया।डॉक्टरों की टीम ने उनकी बाईं आँख का सफल ऑपरेशन करते हुए नेत्र प्रत्यारोपण की प्रक्रिया पूरी की। अब चुन्नू अपनी एक आँख से फिर से इस खूबसूरत दुनिया को देख सकेंगे। चिकित्सकों के अनुसार कुछ समय बाद उनकी दूसरी आँख में भी नेत्र प्रत्यारोपण किया जाएगा, जिससे उनके जीवन में पूरी तरह उजाला लौटने की उम्मीद है।
यह घटना केवल एक व्यक्ति की रोशनी लौटने की कहानी नहीं है, बल्कि यह समाज को एक बड़ा संदेश भी देती है-जब कोई व्यक्ति इस दुनिया को छोड़कर जाता है, उस समय यदि जागरूकता और संवेदनशीलता के साथ नेत्रदान कर दिया जाए, तो उसकी आँखें किसी नेत्रहीन के जीवन में नई रोशनी भर सकती हैं। आज पूरा पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर(मुगलसराय) इस मानवीय पहल का साक्षी बन रहा है। लगातार हो रहे नेत्रदान यह साबित कर रहे हैं कि समाज में मानवता आज भी जीवित है।
हम सभी को अपने जीवन में यह संकल्प लेना चाहिए कि मृत्यु के बाद हमारे नेत्र किसी ज़रूरतमंद के काम आएँ। हमारी छोटी-सी पहल किसी चुन्नू ठठेरा जैसे व्यक्ति के जीवन में फिर से उजाला भर सकती है। साथ ही समाज के प्रत्येक व्यक्ति का यह दायित्व भी बनता है कि अपने आसपास किसी के निधन के बाद उनके परिजनों को नेत्रदान के लिए प्रेरित करें और इस पुनीत कार्य में सहयोग दें।
नेत्रदान महादान है – क्योंकि यह किसी को केवल आँखें नहीं, बल्कि पूरी दुनिया देखने का अवसर देता है।
*डॉ. विनय कुमार वर्मा*



