रफीगंज में दिव्यांग बच्चों के सपनों को मिले पंख; विशेष शिविर में मौके पर ही जारी हुए UDID कार्ड

रफीगंज,औरंगाबाद: समाज के अंतिम पायदान पर खड़े दिव्यांग बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में गुरुवार को रफीगंज स्वास्थ्य केंद्र में एक बड़ी पहल देखी गई। RPWD एक्ट 2016 के प्रावधानों को धरातल पर उतारने के उद्देश्य से जिला प्रशासन के निर्देश पर आयोजित इस ‘दिव्यांगजन सशक्तिकरण शिविर’ ने दर्जनों परिवारों के चेहरे पर मुस्कान बिखेरी।
एक छत के नीचे जांच, पंजीकरण और समाधान: अक्सर दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने के लिए ग्रामीणों को जिला मुख्यालय की लंबी दौड़ लगानी पड़ती थी, लेकिन 14 मई 2026 को आयोजित इस शिविर में विशेषज्ञों की टीम खुद चलकर बच्चों तक पहुँची। विशेषज्ञों की देखरेख में न केवल गहन जांच हुई, बल्कि आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए मौके पर ही डिजिटल कार्ड (UDID) हेतु पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी की गई।
शिविर की उपलब्धियां (एक नजर में)
शिविर के दौरान कुल 32 बच्चों का नया पंजीकरण किया गया, जिनका विवरण निम्नवत है:दिव्यांगता का प्रकार निर्गत प्रमाण पत्रों की संख्या…अस्थि दिव्यांग (Orthopedic) 15
श्रवण दिव्यांग (Hearing Impaired) 12,दृष्टि दिव्यांग (Visually Impaired) 05,कुल डिजिटल पंजीकरण 32
विशेषज्ञों का दल रहा सक्रिय:शिविर की सफलता सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने साझा प्रयास किया। मौके पर:
चिकित्सीय टीम: PHC प्रभारी डॉ. विनोद कुमार, ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. सुमित कुमार और अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. अनूप कुमार ने बच्चों की दिव्यांगता के प्रतिशत का सटीक आकलन किया।
प्रशासनिक सहयोग: शिक्षा विभाग की ओर से प्रखंड साधन सेवी राजीव कुमार एवं जय सिंह ने पंजीकरण और कागजी कार्रवाई में अभिभावकों का मार्गदर्शन किया।
प्रमाण पत्र नहीं, यह ‘सशक्तिकरण’ का दस्तावेज है:प्रखंड साधन सेवी राजीव कुमार ने अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि यह प्रमाण पत्र केवल एक कागज़ का टुकड़ा नहीं, बल्कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कुंजी है। उन्होंने इसके लाभ गिनाते हुए बताया:
“इन बच्चों को स्कूलों में सहज नामांकन, सरकार द्वारा मिलने वाले सहायक उपकरण, विशेष छात्रवृत्ति और भविष्य में रोजगार के अवसरों के लिए इस डिजिटल प्रमाण पत्र की अनिवार्य आवश्यकता है। हमारा लक्ष्य है कि कोई भी दिव्यांग बच्चे शिक्षा और सुविधाओं से वंचित न रहे।



